Cg Big News-एसईसीएल मुआवजा घोटाला…बरसो से जिस भूइयां में रह रहे हैं ग्रामीण, अब बिना मुआवजा उसे खाली कराने नोटिस…आरोप भू माफियाओं के इशारे पर चल रहा है एसडीएम कार्यालय…फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपनों को बांट दिया 18 करोड़ का मुआवजा…एसईसीएल से लेकर एसडीएम कार्यालय के नुमाइंदे तक संदेह के दायरे में…दो आरोपियों के ठीकाने पर सीबीआई मार चुकी है छापा…पढ़िए कटघोरा के ग्रामीणों का दर्द

बिलासपुर । कोरबा जिले का कटघोरा तहसील इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल यहां के दो गांव की भूतल में कोयले की भरमार है। एसईसीएल ने इन दोनों गांव की जमीन को भू अर्जन कर लिया है। बरसो से जिस भूइयां में ग्रामीण रह रहे थे, खेती किसानी कर रहे थे, अब उन्हें इस गांव को छोड़कर जाना पड़ेगा, लोग जाने के लिए के लिए तैयारी है, बशर्ते उन्हें मुआवजा मिले। मुआवजे में भी सेटिंग चल रही है। आरोप है कि अपने अपने को 18 करोड़ का मुआवजा बांट दिया गया। मुआवजे में भी गड़बड़ी की गई। कटघोरा के पूर्व एसडीएम पर जमकर आरोप लगे अब ग्रामीणों कटघोरा एसडीएम रोहित सिंह पर भी आरोप लगा रहे हैं। मामले में सीबीआई की भी एंट्री हो चुकी है।
हमारे कोरबा संवाददाता जितेंद्र यादव के मुताबिक ये गांव है मलगांव और रलिया तथा सुआभोड़ी। हमारे संवाददाता को गांव के देव सिंह कंवर व जवाहर कंवर ने बताया कि गांव के नीचे कोयले की खान निकल आई। ये दोनों गांव एनएच-6 से लगा हुआ है। कोल खनन के लिए इन गांवों को खाली कराया जाना है। इसके लिए मुआवजा भी दिया जाना है, पर ग्रामीणों का आरोप है कि एसडीएम कार्यालय के माध्यम से कुछ लोगों को मुआवजा की रकम दी गई, वास्तविक हकदारों को मुआवजा नहीं मिला। मुआवजे के नाम पर 18 करोड़ से अधिक का घोटाला किया गया। फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपने लोगों को ही मुआवजा बांटा गया है। ग्रामीणों ने जब बिना मुआवजे के गांव खाली करने से मना कर दिया तब दोनों गांव की लाइट काट दी गई।
आदिवासी ग्रामीणों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इस बात को लेकर पूर्व मंत्री ननकी राम कंवर ने बीते दिनों कोरबा कलेक्टर से शिकायत भी की थी, पर अब तक कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीण भी नाराज है, तथा इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर कब कार्रवाई होगी।
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि इसके पहले भी उक्त अधिकारी पर तहसीलदार रहते एनएच निर्माण के दौरान अपने कार्यालय के किसी कर्मचारी के नाम पर मुआवजा निकलवाया गया था। डायवर्सन में भी गड़बड़ी के आरोप लगे थे। उसी अधिकारी को एसडीएम बनाकर बैठा दिया गया।
ग्रामीण बताते हैं कि एसईसीएल के अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर बड़ा खेल किया जा रहा है। मुआवजा के नाम पर 18 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की गई है।
विरोध करने वाले ग्राम पंचायत दीपका के पंच जवाहर सिंह चौहान नोटिस भेज दिया गया। ग्रामीण यह भी कह रहे हैं कि कटघोरा के तहसीलदार रहते रोहित सिंह ने जो आदेश पारित किया था, उसकी जांच अब एसडीएम रहते स्वयं कर रहे हैं। बहरहाल इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में बेहद आक्रोश है।
जानिेए क्या है मुआवजा घोटाला
एसईसीएल की दीपका विस्तार परियोजना के तहत मलगांव, रोलिया तथा सुआभोंडी की जमीन को एसईसीएल ने अधिग्रहण किया है। इन गांव को खाली करने के पहले ग्रामीणों को मुआवजा दिया जाना था। इसमें 300 किसानों का नाम था। मुआवजा शिविर के दौरान राजस्व अधिकारियों से लेकर एसईसीएल के अधिकारियों ने सांठगांठ की और प्रभावित किसानों की संख्या बढ़ाकर 16 सौ कर दिया। आरोप है कि इसमें 16 लोगों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर 18 करोड़ का मुआवजा बांट दिया गया। जब मामला बाहर आया तो जमकर बवाल मचा। सीबीआई ने इसकी जांच की। 18 नवंबर 2024 सीबीआई ने दीपका निवासी राजेश जायसवाल, तथा हरीद निवासी श्यामू जायसवाल के घर छापेमारी की। अभी भी पूरा मामला संदेह व जांच के दायरे में है। फिलहाल इसकी जांच जारी है।